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Showing posts with the label Gulam Ali

Khushboo jaise log mile (खुशबू जैसे लोग मिले)

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This one is from an album with Ghulam Ali, composed by Gulzar : खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में, एक पुराना खत खोला अनजाने में। शाम के साये बलिश्तों से नापे हैं, चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में।

Dil dhadakne ka sabab (दिल धड़कने का सबब)

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 A Ghazal sung by Ghulam Ali : दिल धड़कने का सबब याद आया, वह तेरी याद थी अब याद आया। आज मुश्किल था सम्भलना ऐ दोस्त, तू मुसीबत में अजब याद आया।

Faasle aise bhi honge (फासले ऐसे भी होंगे)

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A beautiful Ghazal sung by Ghulam Ali : फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था, सामने बैठा था मेरे, और वो मेरा ना था। वो की खुशबू की तरह फैला था मेरे चार सू, मैं उसे महसूस कर सकता था, छु सकता न था।

Kuch din to baso meri aankhon mein (कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में)

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कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में, फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या। कोई रंग तो दो मेरे चेहरे को, फिर ज़ख़्म अगर महकाओ तो क्या।

Kabr (कब्र)

न उड़ा  ठोकरों से, मेरी खाक ऐ कब्र जालिम यही एक रह गयी है