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Showing posts with the label Love Shayari

Koi Deewana kehta hai (कोई दीवाना कहता है)

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Popular poem by Poet Kumar Vishwas :  रंग दुनिया ने दिखाया है निराला, देखूँ, है अँधेरे में उजाला, तो उजाला देखूँ आइना रख दे मेरे हाथ में,आख़िर मैं भी, कैसा लगता है तेरा चाहने वाला देखूँ जिसके आँगन से खुले थे मेरे सारे रस्ते, उस हवेली पे भला कैसे मैं ताला देखूँ

Ek Prashn, Ek Uttar (एक प्रश्न, एक उत्तर)

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प्यार कभी एकतरफा न होता है न होगा, कहा था मैंने। दो रूहों की एक मिलन की जुड़वां पैदाइश है यह, प्यार अकेला जी नहीं सकता। जीता है तो दो लोगों में, मरता है तो दो मरते हैं।

Panah (पनाह)

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From the Book Pukraaj by Gulzaar : उखाड़ दो अरज़-ओ-तूल खूंटों से बस्तियों के समेटो सडकें, लपेटो राहें उखाड़ दो शहर का कशीदा कि ईंट - गारे से घर नहीं बन सका किसी का

Uska Hai (उसका है)

A Ghazal sung by Jagjit Singh : मुझ में जो कुछ अच्छा है, सब उस का है। मेरा जितना चर्चा है, सब उसका है। उस का मेरा रिश्ता बड़ा पुराना है, मैंने जो कुछ सोचा है, सब उस का है।

Wafa (वफ़ा)

जाने क्या सोच के लहरे साहिल से टकराती हैं और फिर से लौट जाती हैं, समझ नहीं आता के वो किनारो से बेवफाई करती हैं या फिर लौट के समुन्दर से वफ़ा निभाती है।

Phir Bhi (फिर भी)

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Lines by Jagjit singh : किसी का यूं तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी, ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी। हज़ार बार ज़माना इधर से गुज़रा है, नयी नयी सी है कुछ तेरी रह-गुज़र फिर भी।

Dil ko kya ho gaya (दिल को क्या हो गया)

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A ghazal by Jagjit Singh : दिल को क्या हो गया खुदा जाने, क्यों है ऐसा उदास क्या जाने। कह दिया मैं ने हाल-इ-दिल अपना, इस को तुम जानो या खुदा जाने। जानते जानते ही जानेगा,

Raat aankhon mein dhali (रात आँखों में ढली)

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A ghazal by Jagjit Singh... रात आँखों में ढली पलकों पे जुगनू आये, हम हवाओ की तरह जाके उसे छू आये।  बस गयी हैं मेरे एहसास में यह कैसी महक, कोई खुशबू  मैं लगाऊं, तेरी खुशबू आये।

Ishq ka Samundar (इश्क का समंदर)

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  इश्क का समंदर भी क्या समंदर है... जो डूब गया वो आशिक... जो बच गया वो दीवाना !!! जो तैरता ही रह गया वह पति!!!!

Bauchaar (बौछार)

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  A Gulzar composition from the Movie Dus Kahaniyaan (Love Dale) : मैं कुछ कुछ भूलता जाता हूँ अब तुझको, तेरा चेहरा भी धुंधलाने लगा है अब तख़ैयुल में, बदलने लग गया है अब वो सुबह-ओ-शाम का मामूल भी, जिसमें तुझसे मिलने का भी एक मामूल शामिल था।

Huzur iss kadar (हुज़ूर इस कदर)

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Gulzar composition from the movie Masoom : हुज़ूर इस कदर भी न इतरा के चलिए, खुले आम आँचल न लहरा के चलिए। कोई मनचला गर पकड़ लेगा आँचल, ज़रा सोचिये आप क्या कीजियेगा, लगा दे अगर, बढ़ के ज़ुल्फ़ों में कलियाँ, तो क्या अपनों ज़ुल्फ़ें झटक दीजियेगा।

Iss se behtar Nazm kya hogi (इस से बेहतर नज़्म क्या होगी)

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नज़्म उलझी हुई है सीने में, मिसरे  अटके हुए है होंठों पर, लब्ज़ कागज़ पर बैठते ही नहीं, उड़ते रहते है तितलियों की तरह,

Raat Tamir karein (रात तामीर करें)

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This is a Poem written by Gulzar for the Movie Dus Kahaniyaan (Pooranmasi) : एक रात चलो तामीर करें, ख़ामोशी के संगमरमर पर, हम तान के तारीखी सर पर , दो शम्माएं जलाये जिस्मों की।

Maayne badal gaye (मायने बदल गए)

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हर एक नक़्श आरज़ू का, हो गया धुंधला, हर एक ज़ख्म मेरे दिल का भर गया यारो।  अजीब शख्स था, उदास होकर भी यूँ हंस सा दिया,

Sapna (सपना)

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आँख बंद थी तब, जब सपनो में आये थे तुम, रात घनी थी, ख्वाब सुहाने थे, नशा गहरा था। सपनों सी तुम दिखती,पलकों में तुम रहते, कब शभ आँख पे गिरा, कब टूटा सपना मेरा।

Shafaq (शफ़क़)

रोज़ साहिल पे खड़े होके यही देखा है, शाम का पिघला हुआ सुर्ख-सुनहरी रोगन, रोज़ मटियाले-से पानी में यह घुल जाता है।

Bhool Jata hoon (भूल जाता हूँ)

नज़र जब तुम से मिलती है, मैं खुद को भूल जाता हूँ, बस एक धड़कन धड़कती है, मैं खुद को भूल जाता हूँ।

Shayarana (शायराना)

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For people in love for the first time : न जाने कहाँ से निकल रहा है ये शायराना, लिख तो हम ठीक से पेपर भी न पाते थे.... na jaane kahan se nikal raha hai ye shayarana, likh to hum theek se paper bhi na paate the.... - Deep

Khanak (खनक)

दिल टूट जाता है पर खनक नहीं होती, हर धड़कन रोती है पर पलक नहीं रोती, मोहब्बत नाम है

Majak (मजाक)

हमने भी कभी प्यार किया था, थोड़ा नहीं बेशुमार किया था, दिल टूट कर रह गया मेरा,