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Poore ka Poora aakash (पूरे का पूरा आकाश)

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Poem by Gulzar for the movie Dus Kahaniyaan पूरे का पूरा आकाश घुमाकर बाज़ी देखी मैंने, काले घर में सूरज रख के तुमने शायद सोचा था मेरे सारे मोहरे पिट जायेंगे। मैंने एक चिराग जला के अपना रास्ता खोल लिया।

Khaali Samandar (खाली समंदर)

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Lines by Gulzar from the movie dus kahaniyaan उसे फिर लौट के जाना है ये मालूम था उस वक़्त भी, जब शाम की सुर्ख-ओ-सुनहरी रेत पर वो दौड़ती आई थी। और लेहराके यूँ आगोश में बिखरी थी जैसे पूरा का पूरा समंदर लेकर उमड़ी है। उसे जाना है ये वो भी जानती तो थी मगर हर रात फिर भी  हाथ रख कर चाँद पर खाते रहे कसमें। न मैं उतारूंगा अब साँसों के साहिल  से, न वो उतारेगी मेरे आसमान पर झूलते तारों के पींगों से।

Bauchaar (बौछार)

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  A Gulzar composition from the Movie Dus Kahaniyaan (Love Dale) : मैं कुछ कुछ भूलता जाता हूँ अब तुझको, तेरा चेहरा भी धुंधलाने लगा है अब तख़ैयुल में, बदलने लग गया है अब वो सुबह-ओ-शाम का मामूल भी, जिसमें तुझसे मिलने का भी एक मामूल शामिल था।

Huzur iss kadar (हुज़ूर इस कदर)

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Gulzar composition from the movie Masoom : हुज़ूर इस कदर भी न इतरा के चलिए, खुले आम आँचल न लहरा के चलिए। कोई मनचला गर पकड़ लेगा आँचल, ज़रा सोचिये आप क्या कीजियेगा, लगा दे अगर, बढ़ के ज़ुल्फ़ों में कलियाँ, तो क्या अपनों ज़ुल्फ़ें झटक दीजियेगा।

Qatra Qatra (क़तरा-क़तरा)

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Gulzar's composition for the movie Ijaazat : क़तरा-क़तरा मिलती है, क़तरा-क़तरा जीने दो, ज़िन्दगी है (ज़िन्दगी है), बहने दो (बहने दो), प्यासी हूँ मैं, प्यासी रहने दो। कल भी तो कुछ ऐसा ही हुआ था, नींद में थी, तुमने जब छुआ था, गिरते-गिरते बाहों में बची मैं,

Ek akela is shehar mein (एक अकेला इस शहर में)

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Gulzar's composition for Gharonda: A stranger in a new city.... एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में, आब-ओ-दाना ढूंढता है, आशियाना ढूंढता है। दिन खाली-खाली बर्तन है, और रात है जैसे अँधा कुआं, इन सूनी अँधेरी आँखों में, आंसू की जगह आता है धुंआ।

Tere utaare hue din (तेरे उतारे हुए दिन)

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A poem by Gulzar from the movie Dus Kahaniyaan (Gubbaare) : तेरे उतारे हुए दिन, टंगे हैं लॉन में अब तक, न वो पुराने हुए हैं, न उन का रंग उतरा… कहीं से कोई भी सीवन अभी नहीं उधड़ी।

Raat Tamir karein (रात तामीर करें)

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This is a Poem written by Gulzar for the Movie Dus Kahaniyaan (Pooranmasi) : एक रात चलो तामीर करें, ख़ामोशी के संगमरमर पर, हम तान के तारीखी सर पर , दो शम्माएं जलाये जिस्मों की।

Chhoti si kahani se (छोटी सी कहानी से)

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A Gulzar composition from the movie Ijaazat छोटी सी कहानी से, बारिशों के पानी से, सारी वादी भर गयी, न जाने क्यों, दिल भर गया, न जाने क्यों, आँख भर गयी।

Dil dhoondta hai phir wahi (दिल ढूंढता है, फिर वही)

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A song from the movie Mausam, composed by Gulzar.. दिल ढूंढता है, फिर वही, फुर्सत के रात दिन, बैठे रहे, तसव्वुर-इ-जाना किये हुए। जाड़ों की नर्म धूप और, आँगन में लेट कर, आँखों पे खींच कर तेरे, आँचल के साये को, औंधे पड़े रहे कभी, करवट लिए हुए।

Mera kuch samaan (मेरा कुछ सामान)

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This is Gulzar's composition from the Movie Ijaazat. 'Mera kuchh saaman' earned Gulzar his first National Award for best lyrics. मेरा कुछ सामान, तुम्हारे पास पड़ा है सावन के कुछ भीगे-भीगे दिन रखे हैं और मेरे एक ख़त में लिपटी रात पड़ी है वो रात बुझा दो, मेरा वो सामान लौटा दो

Abhi na parda giraao (अभी न पर्दा गिराओ)

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Gulzaar's composition, used in the movie Shaque : अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो, कि दास्ताँ आगे और भी है अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो! अभी तो टूटी है कच्ची मिटटी, अभी तो बस जिस्म ही गिरे हैं अभी तो किरदार ही बुझे हैं अभी सुलगते हैं रूह के ग़म, अभी धडकते हैं दर्द दिल के अभी तो एहसास जी रहा है

Judai (जुदाई)

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This is a Gulzar composition from the Movie Ghulami. ज़िहाल-इ-मुस्कीन मुकून बा-रंजिश, बहाल-ऐ-हिजरा बेचारा दिल है। सुनाई देती है जिसकी धड़कन, तुम्हारा दिल या हमारा दिल है।

Kabhi Kabhi (कभी कभी)

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कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है, की ज़िन्दगी तेरी ज़ुल्फ़ों की नरम छाओं में गुजरने पाती, तो शादाब हो भी सकती थी। ये रंज-ओ- ग़म की स्याही जो दिल पे छायी है, तेरी नज़र की शुआओं में खो भी सकती थी।

Khaali Makaan (खाली मकान)

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भरे सावन में रेगिस्तान लगता है, ये घर मेरा खाली मकान लगता है। ******************************** Bhare saawan mein registaan lagta hai, ye ghar mera khaali makan lagta hai. - Naseeb (movie)

Noor (नूर)

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चेहरे पे इतना नूर तुम्हारे, आखों में इतना प्यार, ऐसा लगा मिलकर जैसे, आज मिले है हम पहली बार। ***************************** Chehre pe itna noor tumhare, aankhon mein itna pyar, aisa laga milkar jaise, aaj mile hai hum pehli baar. - Jeet (Movie)

Parwah (परवाह)

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दिल के छालों को कोई शायरी कहे तो परवाह नहीं, तकलीफ तो तब होती है जब कोई वाह-वाह करता है। *********************** Dil ke chhaalon ko koi shayari kahe to parwah nahi, taqleef to tab hoti hai jab koi wah-wah karta hai. - Devdas (movie)

Saajish (साज़िश)

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इतनी शिद्दत से मैंने तुम्हे पाने की कोशिश की है, की हर ज़र्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साज़िश की है। ***************************** Itni shiddat se maine tumhe paane ki koshish ki hai, Ki har zarre ne mujhe tumse milaane ki saajish ki hai.. - Om Shanti Om (movie)

Kashti (कश्ती)

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हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहाँ दम था, मेरी कश्ती थी डूबी वहां, जहाँ पानी कम था.... ********************************** Humein to apno ne loota, gairon mein kahan dum tha, meri kashti thi doobi wahan, jahan paani kam tha... - Dilwaale (movie)

Aashiqui (आशिकी)

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दिल को जुबां, आँखों को सपने मिल गए, आशिकी में ज़िन्दगी को मायने मिल गए। ****************************** Dil ko jubaan, aankhon ko sapne mil gaye, Aashiqui mein zindagi ko maayne mil gaye.. - Aashiqui 2 (movie)