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Showing posts with the label Dard Shayari

Lakeerein (लकीरें)

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हाथों की लकीरों को पढ़ना तो मुझे नहीं आता, हाँ ये ज़रूर मालूम है, की ये मेरी बात नहीं सुनती। कितना भी चाह लूँ, की किस्मत को पलट दूँ, खूब करके देख लिया, ये मेरी बात नहीं सुनती।

Uska Hai (उसका है)

A Ghazal sung by Jagjit Singh : मुझ में जो कुछ अच्छा है, सब उस का है। मेरा जितना चर्चा है, सब उसका है। उस का मेरा रिश्ता बड़ा पुराना है, मैंने जो कुछ सोचा है, सब उस का है।

Bhool jaate hain (भूल जाते हैं)

जाने क्यों लोग हमें आजमाते है, कुछ पल साथ रहने के बाद दूर चले जाते है, सच ही कहते है लोग की सागर के मिलने के बाद, लोग बारिश को भूल जाते हैं। 

Na kijiye (न कीजिये)

आंसुओं को पलकों पे लाया न कीजिये, दिल की बातें हर किसी को बताया न कीजिये, लोग मुट्ठी में नमक लिए फिरते हैं, अपने हर ज़ख्म दिखाया न कीजिये।

Jazbaat (जज्बात)

पत्थर की है दुनिया जज्बात नहीं समझती, दिल में क्या है वो बात नहीं समझती, तनहा तो चाँद भी है सितारों के बीच, पर चाँद का दर्द वो रात नहीं समझती।

Wafa (वफ़ा)

जाने क्या सोच के लहरे साहिल से टकराती हैं और फिर से लौट जाती हैं, समझ नहीं आता के वो किनारो से बेवफाई करती हैं या फिर लौट के समुन्दर से वफ़ा निभाती है।

Saza (सजा)

रोने की सजा न रुलाने की सजा है, ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सजा है, हस्ते है तो आँखों से निकल आते है आंसू, ये उस शख्स से दिल लगाने की सजा है।

Khwahish (खवाहिश)

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खवाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की। आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है। अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे। क्यों की जिसकी जितनी जरुरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे।

Deewana (दीवाना)

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टुकड़े पड़े थे राह में किसी हसीना की तस्वीर के, लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया...!!!

Khushboo jaise log mile (खुशबू जैसे लोग मिले)

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This one is from an album with Ghulam Ali, composed by Gulzar : खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में, एक पुराना खत खोला अनजाने में। शाम के साये बलिश्तों से नापे हैं, चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में।

Katra (कतरा)

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तुम्हारे गम की डली उठाकर, जुबां पे रख ली है, देख मैंने। ये कतरा  - कतरा पिघल रही है, मैं कतरा -कतरा ही जी रहा हूँ।

Jahan pe chhod diya (जहाँ पे छोड़ दिया)

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सजा पे छोड़ दिया, जहाँ पे छोड़ दिया, हर एक काम को हम ने खुदा पे छोड़ दिया। वो हम को याद रखे या फिर भुला दे, उसी का काम था, उस की रज़ा पे छोड़ दिया।

Dil dhadakne ka sabab (दिल धड़कने का सबब)

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 A Ghazal sung by Ghulam Ali : दिल धड़कने का सबब याद आया, वह तेरी याद थी अब याद आया। आज मुश्किल था सम्भलना ऐ दोस्त, तू मुसीबत में अजब याद आया।

Intezaar (इंतज़ार)

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इंतज़ार कर भी लें, गर पता हो की इंतज़ार कब तक है, उस इंतज़ार का भी क्या मज़ा, की तड़प भी है, और पता भी नहीं...

Qatra Qatra (क़तरा-क़तरा)

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Gulzar's composition for the movie Ijaazat : क़तरा-क़तरा मिलती है, क़तरा-क़तरा जीने दो, ज़िन्दगी है (ज़िन्दगी है), बहने दो (बहने दो), प्यासी हूँ मैं, प्यासी रहने दो। कल भी तो कुछ ऐसा ही हुआ था, नींद में थी, तुमने जब छुआ था, गिरते-गिरते बाहों में बची मैं,

Faasle aise bhi honge (फासले ऐसे भी होंगे)

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A beautiful Ghazal sung by Ghulam Ali : फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था, सामने बैठा था मेरे, और वो मेरा ना था। वो की खुशबू की तरह फैला था मेरे चार सू, मैं उसे महसूस कर सकता था, छु सकता न था।

Maayne badal gaye (मायने बदल गए)

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हर एक नक़्श आरज़ू का, हो गया धुंधला, हर एक ज़ख्म मेरे दिल का भर गया यारो।  अजीब शख्स था, उदास होकर भी यूँ हंस सा दिया,

Paigam (पैगाम)

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आँखें रो पड़ी, उनका न पैगाम आया, चले गए हमें अकेला छोड़ के, ये कैसा मुकाम आया, मेरी तन्हाई हंसी मुझपे, और बोली बता,

Ranjish hi Sahi (रंजिश ही सही)

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A beautiful Ghazal sung by Mehdi Hassan : रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ। माना की मुहब्बत का छिपाना है मुहब्बत, चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ। 

Bewafai ne toda (बे-वफाई ने तोडा)

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इस क़दर तोडा है मुझे  उस की  बे-वफाई ने "ग़ालिब" अब कोई अगर प्यार से भी देखे तो बिखर् जाता हूँ मै। ***************************** Iss kadar toda hai mujhe uski bewafai ne Gaalib, Ab koi agar pyar se bhi dekhe to bikhar jaata hoon main...