हाथों की लकीरों को पढ़ना तो मुझे नहीं आता, हाँ ये ज़रूर मालूम है, की ये मेरी बात नहीं सुनती। कितना भी चाह लूँ, की किस्मत को पलट दूँ, खूब करके देख लिया, ये मेरी बात नहीं सुनती।
A Ghazal sung by Jagjit Singh : मुझ में जो कुछ अच्छा है, सब उस का है। मेरा जितना चर्चा है, सब उसका है। उस का मेरा रिश्ता बड़ा पुराना है, मैंने जो कुछ सोचा है, सब उस का है।
खवाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की। आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है। अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे। क्यों की जिसकी जितनी जरुरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे।
This one is from an album with Ghulam Ali, composed by Gulzar : खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में, एक पुराना खत खोला अनजाने में। शाम के साये बलिश्तों से नापे हैं, चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में।
Gulzar's composition for the movie Ijaazat : क़तरा-क़तरा मिलती है, क़तरा-क़तरा जीने दो, ज़िन्दगी है (ज़िन्दगी है), बहने दो (बहने दो), प्यासी हूँ मैं, प्यासी रहने दो। कल भी तो कुछ ऐसा ही हुआ था, नींद में थी, तुमने जब छुआ था, गिरते-गिरते बाहों में बची मैं,
A beautiful Ghazal sung by Ghulam Ali : फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था, सामने बैठा था मेरे, और वो मेरा ना था। वो की खुशबू की तरह फैला था मेरे चार सू, मैं उसे महसूस कर सकता था, छु सकता न था।
A beautiful Ghazal sung by Mehdi Hassan : रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ। माना की मुहब्बत का छिपाना है मुहब्बत, चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ।
इस क़दर तोडा है मुझे उस की बे-वफाई ने "ग़ालिब" अब कोई अगर प्यार से भी देखे तो बिखर् जाता हूँ मै। ***************************** Iss kadar toda hai mujhe uski bewafai ne Gaalib, Ab koi agar pyar se bhi dekhe to bikhar jaata hoon main...